Angered by the action of demolishing houses in Rewa: रीवा जिले की गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम दुआरी में शासकीय जमीन पर लगभग 50 वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों के घरों को प्रशासन द्वारा घेरने की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जमीन को गहरा कराकर उसे तालाब की भूमि बताया जा रहा है और इसी आधार पर उनके घर तोड़ने की कार्रवाई करवाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दशकों से यहां रह रहे हैं और उनके परिवारों का पूरा जीवन इसी बसाहट से जुड़ा है, लेकिन अचानक घर खाली कराने और तोड़ने की कार्रवाई से वे बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव में सरपंच को वोट न देने के कारण बदले की भावना से यह कार्रवाई करवाई जा रही है। उनका कहना है कि शासन की विभिन्न योजनाओं में गरीबों को शासकीय भूमि पर कब्जे का पट्टा देने और उन्हें बसाने की बात कही जाती है, लेकिन उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उन्हें उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीण सुबह से ही कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या बताने और न्याय की मांग को लेकर बैठे रहे।
ग्रामीणों के मुताबिक वे कलेक्टर से मिलकर अपनी स्थिति बताना चाहते थे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इससे ग्रामीणों में और नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी वर्षों पुरानी बसाहट को मान्यता दी जाए, उन्हें जमीन का पट्टा दिया जाए और घर तोड़ने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।
