Site iconSite icon SHABD SANCHI

सतना : गैविनाथ मंदिर में जलाभिषेक के दौरान वृद्ध श्रद्धालु की मौत, परिसर में मची अफरा-तफरी

An elderly devotee died during the Jalabhishek ceremony at the Gaivinath temple in Satna.An elderly devotee died during the Jalabhishek ceremony at the Gaivinath temple in Satna.

An elderly devotee died during the Jalabhishek ceremony at the Gaivinath temple in Satna.

सतना। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर रविवार को सतना के ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध गैविनाथ धाम में एक दुखद घटना सामने आई है। भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच एक बुजुर्ग श्रद्धालु अचानक अचेत होकर गिर पड़े, जिन्हें अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद कुछ समय के लिए मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया और मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई।

जलधारी के पास अचानक हुए अचेत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार की छुट्टी और पुरुषोत्तम मास का संयोग होने के कारण सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए मंदिर प्रबंधन ने विशेष जलधारी की व्यवस्था की थी, ताकि कतारें लगातार चलती रहें। इसी दौरान पटना कला गांव के रहने वाले लगभग 70 वर्षीय बुजुर्ग जयनिवास गर्ग भी बाबा भोलेनाथ के दर्शन और अभिषेक के लिए लाइन में लगे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जलधारी के समीप पहुंचते ही वे अचानक लड़खड़ाए और बेहोश होकर जमीन पर गिर गए।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
बुजुर्ग के गिरते ही आस-पास मौजूद श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के सदस्यों ने तुरंत उन्हें संभाला और एम्बुलेंस व निजी वाहन की मदद से तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि अत्यधिक भीड़ के कारण उत्पन्न हुई स्थिति, बढ़ती उम्र और अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने (संभावित हृदयघात) की वजह से यह हादसा हुआ है, लेकिन मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।

स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
पुरुषोत्तम मास के चलते आगामी दिनों में भी गैविनाथ मंदिर में इसी तरह हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की पूरी संभावना है। रविवार को हुए इस हादसे के बाद अब मंदिर परिसर में आपातकालीन चिकित्सा किट, प्राथमिक उपचार दल और पुख्ता सुरक्षा इंतजामों की जरूरत मजबूती से महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल से समय रहते निपटा जा सके।

Exit mobile version