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भारत ने खामेनेई की मौत पर जताया शोक! विदेश सचिव ईरानी दूतावास पहुंचे, श्रद्धांजलि दी

Ali Khamenei Vikram Misri Condolence: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के छठे दिन हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत ने पहली बार ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के निधन पर आधिकारिक शोक व्यक्त किया है।

भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव Vikram Misri ने नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका (Condolence Book) पर हस्ताक्षर किए और श्रद्धांजलि अर्पित की। इसे भारत की संतुलित विदेश नीति (Balanced Foreign Policy) और कूटनीतिक पहल (Diplomatic Outreach) के रूप में देखा जा रहा है।

US-Israel Airstrikes में Khamenei की मौत

रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों (US-Israel Joint Strikes) में खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरान ने एक दिन बाद इसकी आधिकारिक पुष्टि की। उनके निधन के बाद कई देशों की ओर से शोक संदेश भेजे जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति (Middle East Geopolitics) में इसे एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

Indian Port Visit के बाद Iranian Warship पर हमला

इस बीच युद्ध समुद्री मोर्चे पर भी खतरनाक रूप ले चुका है। अमेरिका ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को श्रीलंका के पास निशाना बनाकर डुबो दिया।

यह युद्धपोत 18 फरवरी को विशाखापट्टनम में आयोजित International Fleet Review 2026 (International Fleet Review 2026) और मिलान-2026 बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास (MILAN-2026 Multilateral Naval Exercise) में शामिल होने आया था। 25 फरवरी को भारत से रवाना होने के बाद जब यह दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 समुद्री मील (Nautical Miles) दूर था, तभी इस पर हमला हुआ।

श्रीलंकाई नौसेना के अनुसार 87 शव बरामद किए गए हैं, 32 लोगों को बचाया गया है, जबकि करीब 60 लोग अब भी लापता हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो से जहाज को निशाना बनाया गया। द्वितीय विश्व युद्ध (World War-II) के बाद पहली बार किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने युद्ध में इस तरह किसी जहाज को डुबोया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका अब तक ईरान के 20 युद्धपोत (Iranian Warships) को समुद्र में निशाना बना चुका है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में यह संघर्ष अब पूर्ण पैमाने के नौसैनिक टकराव में बदलता दिख रहा है।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि एक ओर उसके ईरान से रणनीतिक और ऊर्जा संबंध हैं, वहीं अमेरिका और इजराइल उसके महत्वपूर्ण साझेदार हैं।

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