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MP: अक्षय तृतीया से पहले बाल विवाह पर सरकार की सख्ती, सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते सक्रिय

MP Akshaya Tritiya Bal Vivah: अक्षय तृतीया से पहले मध्य प्रदेश सरकार बाल विवाह पर सख्त हो गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले सामूहिक विवाह आयोजनों पर विशेष निगरानी रखी जाए, सभी जिलों में तुरंत कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएं, संवेदनशील क्षेत्रों में उड़न दस्ते सक्रिय किए जाएं और किसी भी संदिग्ध बाल विवाह को समय रहते रोका जाए, ताकि इस शुभ अवसर पर प्रदेश में कहीं भी बाल विवाह न होने पाए।

MP Akshaya Tritiya Bal Vivah: अक्षय तृतीया के अवसर पर प्रदेशभर में होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने बाल विवाह पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते सक्रिय होंगे

विभाग के निर्देशानुसार अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में उड़न दस्तों का गठन कर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन को सामूहिक विवाह आयोजनों की पहले से सूची तैयार करने और मौके पर सख्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध बाल विवाह को समय रहते रोका जा सके।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत विशेष अभियान

प्रदेश में चल रहे ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत सरकार शून्य बाल विवाह के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों में बाल विवाह के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन कुछ जिलों में यह समस्या अभी भी बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर किसी भी कीमत पर बाल विवाह न होने देने का निर्णय लिया गया है।

स्कूल-कॉलेजों में चलेगा जागरूकता अभियान

सरकार के निर्देश पर स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह न होने देने की सामूहिक शपथ लेंगे। पंचायत और वार्ड कार्यालयों में बैनर-पोस्टर के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

आंगनबाड़ी और स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका

गांवों में स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यें परिवारों को बाल विवाह नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार और पंचायत सचिव मिलकर 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार करेंगे और उनके परिवारों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

शिकायत के लिए हेल्पलाइन और पोर्टल सक्रिय

बाल विवाह की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का व्यापक प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा ‘बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्राम-वार्ड स्तर पर बनेगा सूचना दल

प्रत्येक ग्राम और वार्ड स्तर पर सूचना दल गठित किए जाएंगे, जिसमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये दल संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना प्रशासन को देंगे। सचिव जी.वी. रश्मि ने स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवार लेखन के जरिए व्यापक जागरूकता फैलाने के भी निर्देश दिए हैं। उद्देश्य है कि समाज में सही उम्र में विवाह के महत्व और बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर जन-चेतना बढ़े तथा अक्षय तृतीया पर प्रदेश में कहीं भी बाल विवाह न हो।

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