Akhilesh Yadav meet Azam Khan : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को आखिर आजम खां की याद आ गई। 349 दिनों के बाद अखिलेश यादव आज, 22 अक्टूबर को आजम खां से जेल में मुलाकात करेंगे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले होने वाली इस मुलाकात को सियासी नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।
जेल में आज़म खां से मिलेंगे अखिलेश यादव
आधिकारिक तौर पर अखिलेश यादव आजम खां का हाल जानने के लिए उनसे मिलने जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की रामपुर जेल में आज यूपी चुनाव 2027 के लिए सीटों का बड़ा मंथन हो सकता है। दोनों नेताओं के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की चुनावी रणनीति पर चर्चा हो सकती है… इसके अलावा, अखिलेश यादव आजम खां के साथ विधानसभा चुनाव में गठबंधन की स्थिति पर भी चर्चा कर सकते हैं।
सपा को सता रहा मुस्लिम वोट खोने का डर
बता दें कि दोनों नेताओं की ये मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब एक तरफ आजम खां लंबे समय से जेल में बंद हैं और दूसरी तरफ सपा प्रमुख 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं। और सोशल मीडिया पर मौलानाओं ने सपा को मुस्लिम वोट देने ने इनकार दिया है।
दरअसल, मौलाना सैफ अब्बास ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए एक वीडियो जारी किया है, जिमसें उन्होंने कहा कि 34 साल से सपा मुसलमानों को ठग रही है। PDA और राज्यसभा टिकट बंटवारे पर भी सवाल उठाएं हैं और 2027 में सपा-AIMIM को वोट न देने का दावा किया है।
जेल में दोनों नेता बनाएंगे सपा की चुनावी रणनीति
पीडीए का प्लान लेकर चल रहे अखिलेश यादव के लिए ये बड़ा झटका जैसा होगा, अगर उन्हें मुस्लिम वोटों से बड़ा नुकसान होता है तो ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या जेल में होने वाली ये मुलाकात पश्चिमी यूपी में सपा की चुनावी तैयारियों को लेकर हो रही है?चुनाव के लिए आजम खां की सियासी सलाह अखिलेश यादव के लिए कितनी महत्वपूर्ण है?
आजम खां का नाम, समाजवादी पार्टी की राजनीति में बड़े नेताओं की सूची में आता है। सपा सरकार के दौरान आजम खां को समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था। आजम खां की राजनीतिक पकड़ रामपुर और मुरादाबाद मंडल के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मानी जाती है। खासतौर पर मुस्लिम मतदाताओं के वोटर्स सपा के खाते में ट्रांसफर करने में आजम खां का बड़ा योगदान रहा है। यही वजह है कि जेल में बंद होने के बावजूद सपा प्रमुख अखिलेश यादव आजम खां से सियासी सलाह लेते रहते हैं। यही नहीं, आजम खां की गैरमौजूदगी में भी अखिलेश यादव का समय-समय पर उनसे या उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात करना यह संकेत देता रहा है कि सपा का नेतृत्व उनके राजनीतिक कद को महत्व देता है।
सपा के लिए आज़म खां की सलाह कितनी महत्वपूर्ण?
अब जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं तो अखिलेश यादव और आजम खां की मुलाकात को केवल औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा सकता है। ऐसे में यह साफ संकेत देखा जा रहा है कि पश्चिमी यूपी की विधानसभा सीटों की रणनीति तय करने के लिए अखिलेश यादव पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। आजम खान और अखिलेश यादव की इस मुलाकात पर, सपा नगर अध्यक्ष आसिम राजा ने जानकारी देते हुए बताया कि रामपुर जेल में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की आजम खां से मुलाकात होनी है। आजम खां की तबीयत भी खराब चल रही है, वह उनका हाल जानेंगे। दोनों पार्टी के बड़े नेता हैं तो ये स्वाभाविक है कि जब ये दोनों नेता मिलेंगे तो सियासी बातें भी होंगी। ये बातें किस पहलू पर होंगी, यह तो सिर्फ वही जानते होंगे या फिर परिवार के लोग।
यूपी पश्चिमी क्षेत्रों पर हो सकती है चर्चा
सपा नेताओं के इस बयान से यह साफ हो गया है कि अखिलेश यादव और आजम खां की कल होने वाले ये मुलाकात सियासी मायने में बेहद खास है। अगर पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की 126 सीटों में से सपा और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन ने कुल 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें 33 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में आई थीं।
वहीं, मुरादाबाद मंडल की 27 विधानसभा सीटों में से 17 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी। जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो मुरादाबाद की 6 सीटों में से 5 पर सपा को सफलता मिली थी। रामपुर की पांच सीटों में से तीन, संभल की 4 में से 3 और अमरोहा की 4 में से 2 सीटों पर सपा के उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके अलावा बिजनौर की 8 सीटों में से 4 सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
इन नतीजों को देखकर ये कहा जा सकता है कि मुरादाबाद मंडल और पश्चिमी यूपी के कई हिस्से सपा के चुनावी प्रदर्शन में महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव के लिए पार्टी के सामने इन समीकरणों को दोबारा साधने की चुनौती होगी। यही वजह है कि अखिलेश यादव और आजम खां की मुलाकात में पश्चिमी यूपी की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा को अहम माना जा रहा है। पार्टी को उन क्षेत्रों की पहचान करनी होगी, जहां 2022 में उसे सफलता मिली थी, साथ ही उन सीटों पर भी रणनीति बनानी होगी, जहां उसे हार का सामना करना पड़ा था तो अब सवाल ये भी हो सकता है कि क्या अखिलेश यादव आजम खां की राय से उम्मीदवार तय करेंगे?
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी होगी चर्चा
बता दें कि अखिलेश यादव की आजम खां से मुलाकात के दौरान पश्चिमी यूपी के संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है और अब ये भी जान लेते हैं कि किन-किन मुद्दों पर बातचीत हो सकती है? इसके साथ ही जौहर यूनिवर्सिटी से लेकर संभल तक के मुद्दे पर भी बात हो सकती है। क्योंकि आजम खां और उनसे जुड़े जौहर यूनिवर्सिटी के मामले लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय रहे हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और यूनिवर्सिटी से जुड़े विवादों को लेकर सपा अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया और रणनीति तय कर सकती है और इस समय सपा प्रमुख अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर भी चर्चा में हैं।
ऐसे में कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर भी विचार विमर्श किया जा सकता है। क्योंकि कांग्रेस पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर अपनी राजनीतिक मजबूती का दावा कर रही है जबकि जबकि समाजवादी पार्टी अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन के आधार पर सीटों पर दावेदारी कर सकती है। लेकिन साथ ही पार्टी गठबंधन को भी मजूबत बनाए रखना चाहेगी ताकि चुनाव में भाजपा के सामने एक जीत की राह आसान कर सके।
आने वाले समय में ये पता चलेगा कि क्या आजम खां एक बार फिर सपा की चुनावी रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाएंगे, या यह मुलाकात मुख्य रूप से स्वास्थ्य और आपसी संवाद तक सीमित रहेगी?

