भोपाल एम्स के मरीज एवं परिजनों को एआई बताएगा रास्ता, देश का पहला ऐसा हाईटेक हो रहा अस्पताल

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संचालित एम्स अस्पताल का भवन भव्य होने के साथ ही भवन में एकरूपता होने के कारण अस्पताल में संचालित स्वास्थ सुविधाओं तक पहुचने के लिए मरीजों को अब परेशान नही होनो पड़ेगा, क्योकि इस अस्पताल में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की सुविधा विकसित की जा रही है। जिसके माध्यम से मरीज निश्चित स्थान पर पहुच सकेगा। बताया जाता है कि इस तरह की एआई सुविधा वाला देश का यह पहला अस्पताल होने जा रहा है।

आखिर क्यू भटक जाते है लोग

भोपाल एम्स का परिसर काफी बड़ा है। अस्पताल भवनों की अंदरूनी बनावट एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक हैं, लेकिन सब एक जैसे नजर आते हैं, रास्ते भी एक जैसे हैं। ऐसे में बार-बार आने पर भी मरीजों और उनके परिजन को सही विभाग तक पहुंचने में परेशानी होती है। पता पूछते-पूछते मरीज और उनके परिजनों को काफी समय लग जाता है, याहि वजह है कि अस्पताल प्रशासन मरीजों की इस समस्या को दूर करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुविधा बना रहे है। इसके चालू हो जाने पर उन्हे अब भटकना नही पड़ेगा।

क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगा रास्ता

एम्स प्रशासन के अनुसार क्यूआर कोड स्कैन करते ही मरीज को यह पता चल जाएगा कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरो सर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई या डॉक्टर का कक्ष आखिर किस दिशा में है। एम्स भोपाल ने आईआईटी इंदौर की दृष्टि टीम के साथ मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। भोपाल के एक स्टार्टअप की मदद से एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है।

ऐसे करेगा काम

यह सिस्टम गूगल मैप की तरह काम करेगा। एम्स के मोबाइल एप या परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद व्यक्ति जिस स्थान पर जाना चाहता है, उसे सर्च करेगा। इसके बाद एआई उसे चरणबद्ध तरीके से सही रास्ता दिखाएगा। इस व्यवस्था को दो तरह से तैयार किया जा रहा है। पहला वेब आधारित होगा। एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन का लाभ ले सकेंगे। भवनों के बीच पहुंचने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग होगा। भवनों के अंदर, जहां जीपीएस की सटीकता कम हो जाती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे। ये उपकरण मोबाइल को सटीक दिशा-निर्देशन देंगे, जिससे व्यक्ति बिना भटके सही जगह पहुंच सकेगा।

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