इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड (AgustaWestland) को क्लीन चिट मिलने के पांच साल बाद अब भारत के रक्षा क्षेत्र में वापसी हो रही है। यह वही कंपनी है जिसका नाम वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला (VVIP Helicopter Scam) से जुड़ा था और जिसने करीब एक दशक तक भारतीय राजनीति को हिलाकर रख दिया था।
अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस (Adani Defence and Aerospace) और अगस्ता वेस्टलैंड की पैतृक कंपनी लियोनार्डो (Leonardo) के बीच डील को अंतिम रूप दे दिया गया है। अडाणी ग्रुप के अनुसार इसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार को की जाएगी। लियोनार्डो पहले फिनमैकेनिका (Finmeccanica) के नाम से जानी जाती थी।
यह समझौता भारत में एकीकृत हेलिकॉप्टर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने का है। खास तौर पर AW169M और AW109 TrekkerM मॉडल के हेलिकॉप्टरों पर फोकस है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सैन्य और संभावित रूप से सिविल एविएशन क्षेत्र में भी विस्तार कर सकता है। साझेदारी में चरणबद्ध स्वदेशीकरण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) क्षमताएं तथा पायलट प्रशिक्षण भी शामिल हैं।
अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला (AgustaWestland Scam) ₹3,600 करोड़ के वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे (VVIP Helicopter Deal) से जुड़ा था। कंपनी पर 12 AW-101 हेलिकॉप्टरों की खरीद में भारतीय वायुसेना अधिकारियों और बिचौलियों को लगभग ₹360 करोड़ की रिश्वत देने का आरोप लगा था। UPA सरकार (UPA Government) के दौरान 2010 में हुआ यह सौदा 2014 में रद्द कर दिया गया और कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया।
2013 में इटली की जांच एजेंसियों ने रिश्वतखोरी की जांच शुरू की, जिसके बाद सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने मामला उठाया। एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी (Air Chief Marshal SP Tyagi) सहित कुछ लोगों को जेल भी हुई। सीबीआई ने सरकारी खजाने को 398.21 मिलियन यूरो (करीब ₹2,666 करोड़) के नुकसान का आरोप लगाया, जबकि ईडी ने बिचौलिए को 30 मिलियन यूरो (करीब ₹225 करोड़) मिलने का दावा किया।
सबूतों के अभाव में इटली की अदालत ने क्लीन चिट दी और नवंबर 2021 में रक्षा मंत्रालय ने भी कंपनी पर लगे प्रतिबंध को कुछ शर्तों के साथ हटा दिया। यह नई साझेदारी सियाचिन (Siachen) जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सेना की रसद पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टरों की जरूरत को ध्यान में रखकर है। रक्षा मंत्रालय ने पहले सेना के लिए 120 और वायुसेना के लिए 80 हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी। इससे पहले 2014 में आए तीन हेलिकॉप्टरों को कोर्ट केस के कारण स्टोर कर दिया गया था।यह डील मेक इन इंडिया (Make in India) और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली मानी जा रही है, हालांकि पुराने घोटाले की यादें अभी भी बनी हुई हैं।
