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Satna News : डेढ़ साल बाद बिसरा रिपोर्ट से खुला हत्या का राज, जानिए कैसे दोस्तों ने वारदात को दया था अंजाम

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सतना /मैहर। मालिक के प्रति वफादारी और चोरी-बेईमानी में दोस्तों का साथ न एक युवक को महंगा पड़ गया। जिसका खामियाजा उसे अपनी जान गवांकर भुगतना पड़ा। दोस्तों ने उसे अपने रास्ते से हटाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से ज़हर देकर मार डाला। वारदात को ऐसे अंजाम दिया मनो मौत सौभाविक लगे। लेकिन करीब डेढ़ साल बाद आई एक रिपोर्ट ने गुनाहगारों को बेपर्दा कर दिया। और हत्या के आरोप में दोनों दोस्तों को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक मैहर जिले के राममनगर थाना क्षेत्र में दिसंबर 2022 में एक हाइवा चालक सुखलाल यादव (40) निवासी झिन्ना रामनगर की मौत हो गई थी। जिसकी हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों संतोष बैस पिता संपर्क बैस (49) निवासी चचाई देवलोंद शहडोल और पप्पू उर्फ सुरेंद्र पिता रामसजीवन बैस (37) को गिरफ्तार किया है।

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रामनगर टीआई टीकाराम कुर्मी के मुताबिक हाइवा चालक सुखलाल की मौत ना तो स्वाभाविक थी और ना ही आत्महत्या थी। बल्कि उसकी हत्या की गई थी। उसके दोस्त संतोष और सुरेंद्र ने ही मिलकर योजनाबद्ध तरीके से उसकी हत्या की थी। उन्होंने बताया कि सुखलाल का बिसरा प्रिजर्व कर फोरेंसिक लैब सागर भेजा गया था। जहां से करीब डेढ़ साल बाद आई बिसरा की जांच रिपोर्ट में सुखलाल के मौत की वजह जहर बताई गई। जिसके आधार पर पुलिस ने जब विवेचना आगे बढ़ाई तो शक के घेरे में संतोष और सुरेंद्र आए। उनकी तलाश कर सख्ती से पूछताछ की गई तो सुखलाल की मौत पर पड़ा पर्दा उठ गया। दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

ऐसे की वारदात

आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि मृतक और वे दोनों बुढ़वा खदान से हाइवा में बालू लोड करने जाते थे। संतोष और सुरेंद्र चोरी-बेईमानी करते थे लेकिन मृतक उनका साथ नहीं देता था। जिसके कारण उन दोनों की पोल अक्सर मालिक के सामने खुल जाती थी। इस बात से परेशान हो कर संतोष और सुरेंद्र ने सुखलाल को अपने रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। और 7 दिसंबर 2022 को जब तीनों हाइवा लोड करने पहुंचे तो उन्होंने शराब में सल्फास की गोलियां मिला कर सुखलाल को पिला दीं। इसके बाद जब वह हाइवा लेकर खदान से चला और अपने गांव झिन्ना से कुछ आगे बढ़ा तो उसे उल्टियां होने लगीं। तो वह हाइवा खड़ा कर दिया और उसी में सो गया। सुबह जब परिजनों को जानकारी हुई तो वे उसे रीवा मेडिकल कॉलेज ले गए जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उस दौरान सभी ने यही समझा कि तबीयत ख़राब होने के कारण सुखलाल की मौत हो गई है। सुरेंद्र और संतोष परिवार के गम में शामिल होने के लिए भी पहुंचे थे। लेकिन डेढ़ साल बाद आई बिसरा रिपोर्ट ने पोल खोल दी। रामनगर पुलिस ने साइबर सेल सतना की मदद से दोनों को पकड़ कर सलाखों के पीछे धकेल दिया।

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