जय श्री हरि। जय श्री हरि का महीना यानि की पुरुषोत्तम मास शुरू हो गया है। यह महीना 15 जून तक रहेगा। पुरुषोत्तम मास जिसे अधिक मास या मलमास भी कहते हैं। हिंदू कैलेंडर में हर 32-33 महीने में आने वाला एक अतिरिक्त महीना है, जो चंद्र और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाने के लिए हर तीसरे साल यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। यह अत्यंत पवित्र महीना भगवान विष्णु को समर्पित है और इसमें की गई पूजा-पाठ का फल सामान्य महीनों से कई गुना अधिक मिलता है। यह समय अपने जीवन में भक्ति और अनुशासन को बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर माना जाता है।
तीन साल में बढ़ता अतिरिक्त महीना
हिंदू कैलेंडर में धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अधिकमास सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहते हैं। हर तीसरे साल यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित इस पावन महीने में किए गए जप, तप और दान का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है।
मलमास महीना फलदायी होने के पीछे ऐसे है तथ्य
पद्म पुराण के अनुसार, शुरुआत में इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी (देवता) नहीं था. स्वामी विहीन होने के कारण इसे मलमास कहा गया और लोग इसे अपवित्र मानकर, इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं करते थे. हर तरफ उपेक्षा और तिरस्कार झेलने के कारण यह महीना बहुत दुखी रहने लगा। अपनी इस पीड़ा को लेकर मलमास वैकुंठ धाम में.भगवान विष्णु की शरण में पहुंचा. श्रीहरि ने उसकी व्यथा सुनी, उसे सांत्वना दी और सहर्ष स्वीकार कर लिया, भगवान विष्णु ने न केवल उसे अपनी शरण दी, बल्कि उसे अपना सबसे श्रेष्ठ और प्रिय नाम पुरुषोत्तम भी उपहार में दे दिये।
कभी खत्म नही होता है पुण्य
भगवान ने वरदान दिया कि जो भी भक्त इस महीने में निस्वार्थ भाव से मेरी भक्ति, मंत्र जाप और दान करेगा, उसे मेरा विशेष आशीर्वाद मिलेगा और उसका पुण्य कभी खत्म नहीं होगा. इस तरह, जो महीना कभी उपेक्षित था, वह भगवान श्रीहरि की कृपा से सबसे पवित्र और फलदायी पुरुषोत्तम मास बन गया।
पुरुषोत्तम मास
कब है 2026 में- यह 17 मई 2026 (रविवार) से शुरू होकर 15 जून 2026 (सोमवार) तक चलेगा।
पौराणिक महत्व- मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इस अतिरिक्त महीने को अपना नाम श्पुरुषोत्तमश् दिया, इसलिए इसे श्पुरुषोत्तम मासश् कहा जाता है।
क्या करें- इस माह में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, तुलसी अर्चना, दान-पुण्य, भागवत गीता का पाठ और भगवान विष्णु या कृष्ण की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
क्या न करें- मान्यता के अनुसार, इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे नए शुभ कार्य (मांगलिक कार्य) नहीं किए जाते हैं।
लाभ- यह महीना आध्यात्मिक साधना, तप और मन की शांति के लिए सर्वाेत्तम माना जाता है।

