भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार का दिन अडानी समूह के लिए बेहद नुकसानदायक रहा। अमेरिकी बाजार नियामक SEC द्वारा गौतम अडानी और सागर अडानी को व्यक्तिगत रूप से समन भेजने के लिए अदालत से अनुमति मांगने की खबरों के बाद Adani Group Market Cap को लगभग 12.5 बिलियन डॉलर (करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये) का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस खबर ने निवेशकों की चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार खुलते ही अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दौर शुरू हो गया। समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेस (Adani Enterprises) निफ्टी-50 इंडेक्स पर सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा। कंपनी के शेयरों में 10.65% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 1,864.2 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।
यह पूरा विवाद अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) द्वारा दायर एक सिविल केस से जुड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी बाजारों के बंद होने के बाद रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी कि SEC ने अदालत से गौतम अडानी और समूह के कार्यकारी सागर अडानी को ईमेल के जरिए समन भेजने की इजाजत मांगी है। बताया जा रहा है कि भारत ने पहले दो बार इन समन को तामील करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद नियामक ने यह कदम उठाया।
SEC और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अलग-अलग मामले
यह समझना जरूरी है कि अडानी समूह के खिलाफ अमेरिका में दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। SEC का मामला एक सिविल केस है, जो मुख्य रूप से निवेशकों को गुमराह करने और धोखाधड़ी से संबंधित है। वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) का मामला एक आपराधिक केस (Criminal Indictment) है, जिसमें रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
नवंबर 2024 में अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि समूह के अधिकारियों ने भारत में बिजली खरीद समझौतों को सुरक्षित करने के लिए सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी। अमेरिकी कानून के मुताबिक, कोई भी विदेशी कंपनी जो अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाती है, वह व्यापार हासिल करने के लिए विदेशी अधिकारियों को रिश्वत नहीं दे सकती।
निवेशकों के भरोसे पर असर और बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक पहले यह मानकर चल रहे थे कि मामले में कुछ नया नहीं है और समूह को क्लीन चिट मिल सकती है। स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बलिगा के अनुसार, SEC का यह नया कदम अचानक सामने आया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई है। निवेशकों को लग रहा था कि कानूनी प्रक्रियाएं ठंडे बस्ते में हैं, लेकिन नियामक की सक्रियता ने धारणा बदल दी है।
शुक्रवार को समूह की अन्य कंपनियों जैसे अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में भी 3.4% से लेकर 14.5% तक की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह अस्थिरता अगले कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है, क्योंकि वर्तमान में बाजार का सेंटीमेंट पहले से ही कमजोर चल रहा है।
अडानी समूह का पक्ष और बचाव की तैयारी
अडानी समूह ने शुरू से ही इन सभी आरोपों को “निराधार” बताया है। समूह का कहना है कि वे अपनी रक्षा के लिए सभी संभावित कानूनी उपायों का उपयोग करेंगे। समूह ने स्पष्ट किया है कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हैं और उन पर लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोप गलत हैं। फिलहाल, 21 जनवरी के लेटेस्ट SEC फाइलिंग पर समूह की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भारत और अमेरिका के बीच कानूनी प्रक्रियाओं के बीच फंसे इस मामले ने भारतीय कॉरपोरेट जगत में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। चूंकि SEC ने अब अदालत से व्यक्तिगत रूप से समन भेजने की अनुमति मांगी है, इसलिए आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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