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MP: देर रात खुला विधानसभा सचिवालय, पटवारी बोले- भाजपा के इशारे पर विधायक की सदस्यता खत्म की गई

MLA Rajendra Bharti’s Membership Terminated: देर रात विधानसभा सचिवालय खुलने को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए रात में सचिवालय खोला गया, जबकि इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

MLA Rajendra Bharti’s Membership Terminated: देर रात विधानसभा सचिवालय खोलकर कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को भाजपा की साजिश बताया है और इसे लोकतंत्र व संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करार दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया भाजपा के इशारे पर रात के अंधेरे में की गई। उन्होंने कहा, “यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और संवैधानिक संस्थाओं का साफ-साफ दुरुपयोग किया जा रहा है।”

पीसी शर्मा के साथ पहुंचे जीतू पटवारी

मामले की जानकारी मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा विधानसभा पहुंचे और सचिवालय की इस देर रात कार्रवाई पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। पटवारी ने कहा कि विधानसभा सचिवालय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, लेकिन रात में इसे खोलकर काम करवाना पूरी तरह अस्वीकार्य और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस ने इस घटना को “राजनीतिक गुंडागर्दी” और “सत्ता के दुरुपयोग” की मिसाल बताया है। पार्टी ने साफ किया है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता बचाने के लिए वह कानूनी और राजनीतिक स्तर पर पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी।

राजेंद्र भारती का क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 1998 का है। श्याम सुंदर संस्थान की ओर से बैंक में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराई गई थी। आरोप है कि तब कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती ने बैंक के लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेरफेर किया और एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी। 2011 में जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। जांच में एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज की गई। मामला उपभोक्ता फोरम से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से राहत नहीं मिली। अंततः 2015 में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। हाल ही में अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

भाजपा की चुप्पी

इस पूरे मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। कांग्रेस का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और वह विधायक की सदस्यता बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

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