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एमपी का एक ऐसा गांव, यहां रसोई गैस सिलिंडर की कोई टेंशन नही

जबलपुर। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के चलते भारत में एलपीजी का संकट ऐसा बढ़ रहा है कि आम उपभोक्ता सिलिंडर के जुगाड़ में मारा-मारा फिर रहा है, जबकि एमपी के जबलपुर जिले के बंदररकोला गांव में इससे उलट ही नजारा है। यहां के लोगो को सिलिंडर की कोई चिंता नही है और न ही वे एलपीजी को लेकर परेशान हो रहे है।

75 फीसदी घरों में बायो गैस चूल्हा

जबलपुर के बरगी विधानसभा क्षेत्र के बंदरकोला गांव के लोगों में खाना पकाने को लेकर टेंशन फ्री है। इसकी वजह, यहां के लगभग 75 फीसदी घरों में एलपीजी से नहीं बल्कि वायो गैस से चूल्हा जलता है। गांव के लोग वर्षो में अपने घरों में गोबर सयंत्र स्थापित किए हुए है और बटन चालू करते ही गोबर गैस जलना शुरू हो जाती है। इनके घरों में 24 घंटे बायो गैस की सप्लाई हो रही है।

लोगो के लिए मिसाल

बंदरकोला गांव में लगभग ढाई हजार लोगो की जनसंख्या है। इस गांव में करीब चार सौ से अधिक घर हैं। इनमें 300 ऐसे घर हैं, जिनके आंगन में गोबर गैस प्लांट लगे हैं, जिससे यहां की महिलाएं एलपीजी की चिंता से काफी हद तक मुक्त हैं। एलपीजी संकट के इस दौर में एमपी के जबलपुर जिला का यह गांव लोगो के लिए मिसाल है।

गाय का करते है पालन

बताया जाता है कि गांव के लोग गाय का पालन करते है। जिससे उन्हे गोबर के लिए परेशान न होना पड़े और गाय के गोबर से गैस तैयार करके उस गैस का उपयोग खाना बनाने में कर रहे है। ऐसे में गांव के लोगो को एलपीजी की जरूरत ही नही पड़ती, ऐसा भी नही कि गांव के लोगो को एलपीजी के संकट की जानकारी नही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के लोगो को एलपीजी की जरूरत ही नही है। जिन घरों के गोबर गैस प्लांट किसी कारण बस बंद है, ग्रामीण अब उन्हे भी चालू करवाने में लग गए है।

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