बड़वानी। एमपी के बड़वानी में मछुआरों ने सोमवार को अनोखा प्रदर्शन किए है। नर्मदा नदी में मछुआरे अलग-अलग नावों से प्रशासन को ज्ञापन देने के लिए निकले थें। बड़वानी में नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत विस्थापित मछुआरों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किए है। इस आंदोलन का नेतृत्व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने किया। इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों के बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए। मछुआरों की रैली का नेतृत्व कर रही मेधा पाटकर ने कहा कि नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, उन्हे आज तक कानूनी अधिकार नहीं मिले हैं। मेघा पाटकर ने कहा कि मांगो को पूरा नही किया गया तो आंदोलन बड़ा स्वरूप लेगा।

निकाली विशाल नाव रैली
नर्मदा नदी के कसरावद से राजघाट तक मछुआरों ने एक विशाल नाव रैली निकाली। इसमें 30 से अधिक नावों में सैकड़ों लोग सवार थे। मछुआरा संगठनों ने बड़वानी कलेक्टर को ज्ञापन सौंप रहे है। मछुआरों की यह रैली अपने आप में आकर्षक रही। तकरीबन 30 नावों में सैकड़ों मछुआरा परिवार आंदोलन करते हुए नर्मदा की लहरों के बीच निकला।
शासन-प्रशासन को बताई समस्या
मछुआरा संगठनों ने अपने इस आंदोलन के माध्यम से सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार अधिकार देना, प्रस्तावित नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन एवं विपणन संघ का पंजीकरण करना, पुनर्वास लाभ, आवास, आजीविका, और मत्स्य व्यवसाय सहकारी समितियों को सौंपना और ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करना शामिल है।
जताई चिंता
आंदोलनकारियों ने जलाशय में प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन और जलस्तर गिरने से मत्स्याखेट पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मछुआरों को किसान का दर्जा देने, केसीसी कार्ड उपलब्ध कराने, मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता बढ़ाने और पुलिस-प्रशासन की ओर से उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग भी की।
