धार। मध्यप्रदेश में झकझोर देने वाली एक ऐसी तस्वीर। जिसे देखकर हर कोई यह कहने को बेबस हो गया कि प्रकृति के आगे सब बेबस, तो वही शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल भी उठाए जा रहे है। यह मामला है मध्यप्रदेश के धार जिले के जामला गांव से सामने आ रहा है। यहां एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के दौरान अचानक उफनाए नाले में जलती चिता बह गई। अंतिम संस्कार में आए ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शव को बाढ़ के पानी से बाहर निकाला और शव का दूबारा अंतिम संस्कार किए।
यह है घटना
धार जिले के ग्राम जामला के खाड़ापुरा मोहल्ले के निवासी बुजुर्ग बापूसिंह के निधन के बाद परिजन उन्हें गांव के मुक्तिधाम लेकर पहुंचे। मुखाग्नि दिए जाने के कुछ ही समय बाद पास का पहाड़ी नाला अचानक उफान पर आ गया। देखते ही देखते पानी का तेज बहाव चिता को अपने साथ बहाकर ले गया। परिजन और ग्रामीण स्तब्ध रह गए। गम और बेबसी के बीच कुछ ग्रामीण पानी में उतरे और अधजले शव को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर दोबारा चिता तैयार कर अंतिम संस्कार कराया।
सुरक्षित स्थान पर हो मुक्तिधाम
ग्रामीणों की मांग है कि, गांव में बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित स्थान पर स्थायी और सुरक्षित मुक्तिधाम का निर्माण कराया जाए, जिससे इस तरह की अमानवीय और पीड़ादायक स्थिति का सामना ग्रामीणों को न करना पड़े। जानकारी के तहत जिस क्षेत्र से यह घटना सामने आ रही है यह क्षेत्र नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार का है। ऐसे में यह मामला राजनैतिक रूप भी रंग ले रहा है। लोगों का कहना है कि आखिर आदिवासी अंचलों में विकास के करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोग सम्मानजनक अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधा से भी क्यों वंचित हैं? यह घटना सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है।

