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प्रदोष व्रत और पुरुषोत्तम मास के महासंयोग पर देवतालाब में उमड़ा जनसैलाब, ब्रह्म मुहूर्त से लगीं कतारें

A massive crowd thronged Devtalab on the auspicious convergence of Pradosh Vrat and Purushottam Maas.A massive crowd thronged Devtalab on the auspicious convergence of Pradosh Vrat and Purushottam Maas.

A massive crowd thronged Devtalab on the auspicious convergence of Pradosh Vrat and Purushottam Maas.

रीवा। पुरुषोत्तम मास, प्रदोष व्रत और कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि के दुर्लभ व विशेष संयोग पर विंध्य क्षेत्र के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक देवतालाब शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का रिकॉर्डतोड़ जनसैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खुले, भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों की मीलों लंबी कतारें लग गईं। दिनभर हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर शिवलिंग पर जल अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य व मंगलकामना की। पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा।

दुर्लभ संयोग ने बढ़ाया धार्मिक महत्व
पंडित त्रिलोकीनाथ द्विवेदी के अनुसार, इस बार कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि शाम 7:36 बजे तक थी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ हुआ। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि की उपस्थिति के कारण आज शुक्र प्रदोष व्रत का विशेष योग बना। चूंकि पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, इसलिए प्रदोष व्रत के साथ इस संयोग ने पूजा के महत्व को कई गुना बढ़ा दिया। यही वजह रही कि भोर से लेकर देर शाम तक दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जमी रही।

पवित्र शिवकुंड से जल लेकर किया अभिषेक
देवतालाब मंदिर परिसर में स्थित पौराणिक शिवकुंड का इस विशेष अवसर पर खास महत्व देखा गया। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पवित्र शिवकुंड से जल भरा और फिर मुख्य मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर विधि-विधान से अभिषेक किया। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर शिवकुंड के जल से महादेव का अभिषेक करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

एक ही पत्थर से बने मंदिर की अनोखी गाथा
विंध्य क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक व आध्यात्मिक केंद्रों में शुमार देवतालाब शिव मंदिर की मान्यताएं बेहद अनोखी हैं, स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में, एक ही विशाल पत्थर से किया था। ऐसी मान्यता है कि देवतालाब में सच्चे मन से दर्शन करने पर श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पर्यटन और सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम
भीड़ की भारी तादाद को देखते हुए मंदिर प्रशासन, स्थानीय समिति और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की कतारें बनाई गई थीं, जिससे दर्शन सुचारू रूप से हो सके। मुख्य पुजारी ने बताया कि सुबह की मंगला आरती से लेकर देर शाम तक विशेष अनुष्ठान चलते रहे। वहीं, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, देवतालाब अब केवल आस्था का ही नहीं बल्कि पर्यटन का भी एक बड़ा केंद्र बन चुका है, जिसे विभाग द्वारा लगातार प्रमोट किया जा रहा है। इसके चलते अब सालभर यहां बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है।

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