सीधी। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी, दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों में गिद्धों को लेकर एक अच्छी खबर आ रही है। सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ठोंगा में गिद्ध झुंड में देखे गए है। इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को ग्रामीणों ने अपने कैमरों में कैद किया है। गिद्धों का बड़ा कुनबा दिखाई देने से न सिर्फ लोगो में उत्सुकता है बल्कि वन्यजीव प्रेमी और पर्यावरण विशेषज्ञ इस पर चर्चा भी करना शुरू कर दिए है। जो जानकारी आ रही है उसके तहत सीधी जिले में गिद्धो का यह झुंड 6 और 11 जनवरी को देखा गया है।
प्राकृतिक सफाईकर्मी की है संज्ञा
गिद्ध झुंड में रहने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं, जो मृत पशुओं और सड़े-गले मांस को खाकर प्रकृति की स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें “प्राकृतिक सफाईकर्मी” भी कहा जाता है। इस पंक्षी की ऑख बहुत तीव्र होती है, तो उड़ान भरने में यह पंक्षी माहिर होता है।
विलुप्त होता रहा यह पंक्षी
गिद्धों की संख्या में लगातार कंमी आ रही है, यू कहा जाए कि यह पंक्षी मानों विलुप्त होता जा रहा है। इसका एक कारण पशुचिकित्सा में उपयोग की जाने वाली दवा रही है, जो मृत पशुओं के मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंचकर उनकी किडनी फेल कर देती है। वर्ष 2008 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखे गए। तो वही हैवी लाइन बिजली समेत नए उपकरणों को चलाने के लिए किए जा रहे वायरस को कारण बताया जाता है। जिससे गिद्धों की मौत और पलायन की घटनाएं बढ़ी हैं।
बन रहा अनुकूल वातावरण
सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अधिकारियों का मानना है कि सीधी जिले में गिद्धों का दिखाई देना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में इनके लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पक्षियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और यह उत्साहित करने वाला है।
