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1978 का सपना लिया आकार, पहाड़ियों को चीरते हुए 48 साल बाद गोविंदगढ़-सीधी पहुची ट्रेन का ऐसा सफर

रीवा। विंध्य के एक बड़े हिस्सों को जोड़ने वाली ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन अब आकर ले रही है। परियोजना की सोच को पंख लगने में तकरीबन 48 साल लग गए, लेकिन सीधी जिले के चुरहट में सजी धजी मेमू ट्रेन पहुची तो हर कोई उक्त ट्रेन का स्वागत करने एवं इसका उत्सव मानने से अपने को नही रोक पाए। देवेन्द्र नगर से चुरहट के बीच एक मेमू ट्रेन का संचालन शनिवार से शुरू हो गया है। इस ट्रेन की आवाजाही से स्थानिय लोगो को रेल सुविधा मुहैया हो गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने रखी थी आधारशिला

ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना को पहली बार 1978 में प्रारंभिक स्वीकृति मिली थी। 1982-83 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कुंवर अर्जुन सिंह के कार्यकाल में इस रेल परियोजना का शिलान्यास हुआ था। रीवा-सीधी-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना को रेलवे के आधिकारिक स्वीकृत दस्तावेजों में वर्ष 1997-98 में दर्ज किया गया। लंबे समय तक सुस्त रहने के बाद, वर्ष 2014 के बाद इस परियोजना को नई गति मिली। अक्टूबर 2026 में रेलवे और मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों से रीवा से सीधी जिले के चुरहट तक का रेलखंड पूरा हुआ और पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई, जिससे सीधी जिला पहली बार देश के रेल मानचित्र से जुड़ा।

ऐसी है परियोजना

ललितपुर-सतना-रीवा-सीधी-सिंगरौली परियोजना लगभग 541 किलोमीटर लंबी है, जिस पर करीब 9,000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इस मार्ग पर छुहिया घाटी और विंध्य की पहाड़ियों को पार करने के लिए लंबी रेल सुरंगों तथा पुलों का निर्माण किया गया है। इस पूरी 541 किमी परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरी तरह से पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।

छुहिया घाटी का पहाड़ था बड़ी चुनौती

इस रेल परियोजना के लिए सबसे चुनौती पूर्ण कार्य छुहिया घाटी का विशाल पहाड़ था। जिससे ट्रेन को आगे ले जाने की चुनौती थी, लेकिन इस चुनौती को स्वीकार करते हुए 3.34 किलोमीटर की लंबी सुरंग छुहिया घाटी के पहाड़ को काट कर बनाई गई। जिसका नतीजा है कि आज रीवा-सीधी-सिंगरौली रेल परियोजना के तहत छुहिया घाटी (गोविन्दगढ़) में बनी बघवार रेलवे टनल मध्य प्रदेश की प्रमुख और शुरुआती लंबी रेल सुरंगों में से एक होने का न सिर्फ गौरव हासिल कर लिया है बल्कि अब ट्रेन का संचालन शुरू हो गया है।

मध्यप्रदेश की सबसे लंबी सुरंगो में सुमार

छुहिया घाटी (गोविन्दगढ़) में बनी बघवार रेलवे टनल लगभग 3.34 किलोमीटर (3,338 मीटर) लंबी है। यह रीवा और सीधी जिले की सीमा पर छुहिया-गोविंदगढ़ घाटी के नीचे स्थित है। यह ललितपुर-सिंगरौली नई रेल परियोजना का हिस्सा है। हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश में इंदौर-बुदनी नई रेल लाइन परियोजना के तहत 8.64 किलोमीटर लंबी सुरंग (सुरंग-2) का निर्माण कार्य भी चल रहा है, जो राज्य की सबसे लंबी रेल सुरंग बनने जा रही है।

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