मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सुरक्षा व्यवस्था में एक बेहद गंभीर और बड़ी चूक का मामला सामने आया है। शहर के समान थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित बाल संप्रेषण गृह में मंगलवार की सुबह सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। यहाँ चोरी और हाफ मर्डर (हत्या के प्रयास) जैसे संगीन और गंभीर अपराधों में बंद 6 बाल अपचारी (नाबालिग कैदी) बाथरूम की खिड़की का कांच तोड़कर फिल्मी अंदाज में भागने में सफल रहे। इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
सुबह गिनती के दौरान हुआ खुलासा, प्रबंधन के उड़े होश
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार सुबह करीब 7 बजे की है। रोजाना की तरह जब सुबह संप्रेषण गृह के सुरक्षाकर्मियों और प्रबंधन ने बच्चों की गिनती शुरू की, तो उसमें से 6 बच्चे गायब मिले। बच्चों के अचानक मिसिंग होने पर पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और तत्काल उनकी तलाश शुरू की गई। जब अंदर जाकर गहनता से जांच की गई, तो बाथरूम की खिड़की का कांच टूटा हुआ मिला। यह देखते ही प्रबंधन के होश उड़ गए और तुरंत इसकी सूचना स्थानीय समान थाना पुलिस को दी गई।
पुलिस की कई टीमें गठित, संभावित ठिकानों पर दबिश जारी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए समान थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। फरार हुए सभी 6 बच्चे आदतन और गंभीर मामलों के आरोपी हैं, जिसके चलते पुलिस बेहद सतर्कता बरत रही है। शहर के चारों ओर नाकेबंदी कर दी गई है और पुलिस की कई टीमें बनाकर फरार बच्चों की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। इसके साथ ही आसपास के जिलों और थानों को भी अलर्ट भेजकर हुलिया साझा कर दिया गया है।
पहले भी हो चुकी हैं वारदातें, जिम्मेदार अधिकारी नहीं ले रहे सबक
हैरानी की बात यह है कि रीवा के इस बाल संप्रेषण गृह से बच्चों के फरार होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी यहाँ से कई बार बच्चे भाग चुके हैं। बार-बार होने वाली इन वारदातों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और संप्रेषण गृह के प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए और न ही कोई अपेक्षित सुधार किए। प्रबंधन की इसी ढीली कार्यप्रणाली और लापरवाही का नतीजा है कि आज एक बार फिर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया गया।
सुधार केंद्र की व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस घटना के बाद अब बाल संप्रेषण गृह की आंतरिक सुरक्षा और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानूनविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सुधार संस्थानों का मुख्य उद्देश्य कम उम्र में भटके हुए बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना और उनमें सकारात्मक बदलाव लाना होता है। लेकिन रीवा संप्रेषण गृह में व्याप्त घोर लापरवाही के कारण ये बच्चे सुधरने की जगह कानून को ठेंगा दिखाकर भागने जैसे नए अपराधों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे न सिर्फ कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है बल्कि स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। फिलहाल पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी फरार बच्चों को दोबारा पकड़ लिया जाएगा।

