LPG Supply: Hormuz क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने एलपीजी के सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए 5 किलो के सिलेंडर की आपूर्ति बढ़ा दी है। हाल ही के दिनों में करीब 6.6 लाख सिलेंडर की बिक्री देखी गई थी यह कम सप्लाई संभावित बढ़ाओ और बढ़ती मांग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
छोटे सिलेंडरों से सप्लाई मैनेजमेंट पर दिखा फोकस
सरकार ने 5 किलो की एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को बढ़ाकर LPG Supply को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्लानिंग अपनाई है। यह सिलेंडर बिना एड्रेस प्रूफ के केवल पहचान पत्र के आधार पर ही खरीदे जा सकेंगे। यह कदम डिमांड स्प्लिट प्लानिंग का हिस्सा बताया जा रहा है जिससे बड़े 14.2 किलो के सिलेंडर का दबाव कम हो और सीमित गैस स्टॉक को अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचा जा सके।
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Hormuz तनाव और वैश्विक असर का हाल
मौजूदा संकट का मुख्य कारण स्टेट ऑफ़ हार्मोन में बढ़ता तनाव बताया जा रहा है जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल आपूर्ति होती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती दुश्मनी साथी डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों के बाद की स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। इसका सीधा असर LPG Supply सहित ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चैन पर पड़ता देखा जा सकता है जिससे भारत जैसे आयात निर्भर देश अधिक प्रभावित होते हैं।
इससे कीमत और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
5 किलो के सिलेंडर का बाजार मूल्य अभी भी उपलब्ध नहीं है और इनमें कोई सब्सिडी भी नहीं मिलेगी। लेकिन इससे निम्न आय वर्ग पर एक्स्ट्रा लागत का दबाव कम पड़ेगा हालांकि सरकार का कहना है कि यह एक अस्थाई व्यवस्था है जिसका उद्देश्य केवल विपदा की स्थिति में सप्लाई करना है। स्टॉक एक्सचेंज उत्तर से जुड़े ऊर्जा सेक्टरों के संकेत बताते हैं कि अगर संकट की स्थिति लंबे समय तक होती है तो एलपीजी और पेट्रोलियम के प्रोडक्ट की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
निगरानी और ब्लैक मार्केटिंग पर क्या कार्रवाई हुई
सरकार ने एलपीजी सप्लाई चैन में गड़बड़ी रोकने के लिए कड़ी निगरानी शुरू की है ऑफिशियल बयान में बताया कि 3700 से अधिक छापेमारी की गई है 36 डीलरों को निलंबित कर दिया गया है साथ ही में यह कदम ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी को रोकने के लिए लिया गया है जिससे बाजार में संतुलन बना रहे।
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क्या है आगे का आउटलुक
बाजार विश्लेषकों के अनुसार यह कदम कुछ समय के लिए राहत देने के लिए किया गया है लेकिन लंबे समय में भारत को ऊर्जा आयात में स्रोत की विविधता और राजनीतिक भंडारण को बढ़ाने की जरूरत होने वाली है। यदि हार्मोन क्षेत्र में तनाव जारी रहता है तो इसका असर महंगाई और चालू खाते के घाटे पर देखा जा सकता है। यह खबर केवल सूचना के उद्देश्य से इसे किसी भी प्रकार की निवेश की सलाह ना समझे।

