नेपाल समेत देश के 10 राज्यों की 300 बेटियों का होगा विवाह, एमपी के बागेश्वर धाम में शुरू हुई तैयारी

छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला स्थित बागेश्वर धाम में 13 से 15 फरवरी तक विवाह महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा गरीब, अनाथ और आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों के लिए सप्तम सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव 2026 का आयोजन कर रहे है। इस विवाह में गरीब असहाय बेटियों की शादी बागेश्वर महाराज के देखरेख में की जाएगी। इस विवाह का पूरा खर्च धीरेंद्र शास्त्री के द्वारा दान पेटी में आने वाली चढ़ोत्तरी से उठाते हैं।

इन बेटियों की होती है शादी

इस सामूहिक विवाह महोत्सव में शादी करने वाली बेटियां गरीब, अनाथ, मातृहीन, पितृहीन होती हैं। ऐसे विवाह करने वाले जोड़ों को पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री भेंट किए है। बागेश्वर महाराज ने अपने सभी समधियों को समझाइश दी कि वह बहू को बेटी की तरह रखें किसी भी प्रकार की कोई शिकायत न आए।

नेपाल समेत देश के 10 राज्यों की 300 बेटियों का हो रहा विवाह

बागेश्वर धाम में इस वर्ष 300 बेटियों का विवाह हो रहा है। ये बेटियां देश के 10 राज्यों के 60 जिलों से वैवाहिक बंधन में बंधने आ रही हैं. इनमें से एक बेटी नेपाल से बागेश्वर धाम विवाह करने पहुंच रही है। बागेश्वर धाम में इन बेटियों की शादी की तैयारियां धूमधाम से चल रही हैं. वैवाहिक महोत्सव में शामिल होने के लिए वर-वधू के परिवार वाले धाम में पहुंचना भी शुरू हो गए हैं।

वर-वधू को 30 हजार की एफडी दे रहे बाबा

बाबा बागेश्वर ने बताया कि इस बार वर और वधू के नाम से संयुक्त रूप से 30 हजार की एफडी कराई जाएगी। यह एफडी 5 वर्ष से पहले नहीं तोड़ी जा सकेगी। वर और वधू पक्ष को बुलाकर शुरुआती सामग्री भेंट की गई।

बागेश्वर धाम सामूहिक कन्या विवाह 2026 की प्रमुख बातें

तिथि- 13-15 फरवरी 2026 (15 फरवरी को मुख्य विवाह होगा)।
स्थान। बागेश्वर धाम सिद्ध पीठ, छतरपुर, मध्य प्रदेश।
विवाह संख्या- 300 बेटियों का कन्यादान।
पात्रता- अनाथ, दिव्यांग, मातृहीन, पितृहीन या अत्यंत गरीब बेटियां (10 राज्यों से)।
सुविधाएं- विवाह में घरेलू सामान, कपड़े, श्रृंगार, बारात व्यवस्था, और वर-वधू को आशीर्वाद।
विशेष- इसमें सभी वर्गों के लोग शामिल होते हैं।
रजिस्ट्रेशन और जानकारी- पंजीकरण आमतौर पर बागेश्वर धाम के आधिकारिक पेज या सीधे धाम पर की जाती है।

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