एक्टर मनोज कुमार को 21 तोपों की सलामी, राजकीय सम्मान से मुबंई में अंतिम संस्कार, ऐसे बने थें स्टार

मुबंईं। देश भक्ति, प्यार-मोहब्बत एवं सामाजिक सरोकार को छूती हुई फिल्में देने वाले एक्टर मनोज कुमार शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। मुंबई-जुहू के पवनहंस श्माशानघाट में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे से लिपटा हुआ उनका पार्थिव शरीर पवनहंस पहुचा। यहां 21 तोपों की सलामी दी गई और पुलिस जवानों ने उन्हे आखिरी सलामी दिए। मनोज कुमार का बेटा कृणाल गोस्वामी ने उन्हे मुखाग्नि दी। 87 वर्षीय मनोज कुमार को लीवर में समस्या थी और उन्हे अस्पताल में भर्ती किया गया था।

इन्होने दी अंतिम विदाई

अंतिम संस्कार में प्रेम चोपड़ा, सलीम खान, सुभाष घई, अमिताभ बच्चन बेटा अभिषेक, सलीम खान और उनका बेटा अरबाज, सुभाष घई, रंजीत, राज बब्बर, विंदू, दारा सिंह, जिम्मी शेरगिल, राजपाल यादव समेत बॉलीबुड के कलाकार पवनहंस श्मशान घाट में अंतिम विदाई देने पहुंचे।

7 फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजे गए मनोज कुमार

मनोज कुमार को 7 फिल्म फेयर पुरस्कार मिले थे। पहला फिल्म फेयर 1968 में फिल्म उपकार के लिए मिला था। उपकार ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट डायलॉग के लिए चार फिल्म फेयर जीते। 1992 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2016 में उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया।

ऐसी फिल्में मनोज कुमार की रही चर्चा में

शहीद, उपकार, पूरब-पश्चिम, पत्थर के सनम, क्रांति, रोटी कपड़ा और मकान, शोर, बैक-टु-बैक, रेशमी रूमाल, चांद, गृहस्थी जैसी फिल्में दिए है।

चेहरे पर पड़ी लाइट ने बनाया स्टार

जानकारी के तहत मनोज कुमार की फिल्मों में एन्ट्री काफी दिलचस्प रही। वे काम की तलाश में घूम रहे थें। फिल्म स्टूडियों में उन्हे कैमरे एवं फिल्मों का सामान ढ़ोने का काम मिल गया। उनका काम अच्छा रहा। जिसके चलते उन्हे सहायक का काम मिल लगा। एक दिन लाइट टेस्टिंग में हीरों की जगह मनोज कुमार खड़े हो गए और लाइट से उनका चेहरा कैमरें में ऐसे नजर आया कि वे फिल्मी हीरो बन गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *