रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास योजनाओं में करीब 4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का गबन करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस वित्तीय अनियमितता में जिले के 16 सरपंचों के खिलाफ जेल वारंट जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) महताब सिंह गुर्जर ने सख्त रुख अख्तियार किया है।
जिला पंचायत सीईओ ने थाना प्रभारियों की निष्क्रियता और उदासीनता पर गहरी नाराजगी जताते हुए अब रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पुलिस थानों द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और फरार आरोपी सरपंचों को तुरंत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।
वसूली के आदेश और जेल वारंट भी रहे बेअसर
जानकारी के अनुसार, इन 16 सरपंचों ने विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर कुल 3 करोड़ 99 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि का गबन किया था। मामला उजागर होने के बाद जिला पंचायत सीईओ द्वारा पहले इन सभी से राशि वसूली के सख्त आदेश दिए गए थे। निर्धारित समयावधि में राशि जमा न करने और प्रशासन के आदेशों की अवहेलना करने पर नियमानुसार इनके खिलाफ जेल वारंट भी जारी किए गए। लेकिन, संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारियों ने इन वारंटों पर अमल करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिससे आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।
इन ग्राम पंचायतों के सरपंचों पर है कार्रवाई की तलवार
इस बड़े भ्रष्टाचार और गबन मामले में जिले के विभिन्न जनपदों की कई ग्राम पंचायतें शामिल हैं। मुख्य रूप से जवा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत अकौरी व हरदौली, सिरमौर जनपद की बुसौल सदहना, रायपुर कर्चुलियान की बुढ़िया व जोगिनहाई, रीवा जनपद की भोलगढ़ और मऊगंज क्षेत्र की पांच विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच इस सूची में शामिल हैं। अब देखना होगा कि जिला पंचायत सीईओ के पत्र के बाद रीवा पुलिस प्रशासन इन रसूखदार और फरार सरपंचों के खिलाफ क्या एक्शन लेता है।

